चीन-रूस और अमेरिका के क्लब में भारत की धमाकेदार एंट्री: DRDO ने किया ‘हाइपरसोनिक’ इंजन का सफल टेस्ट
भारत ने रक्षा तकनीक के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक छलांग लगाई है। देश के वैज्ञानिकों ने एक अत्याधुनिक हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट इंजन विकसित कर लिया है, जो दुश्मन के रडार से बचे रहते हुए बेहद तेज़ गति से हमला करने में सक्षम है। हैदराबाद में हाल ही में हुए परीक्षण के दौरान इस इंजन ने लगातार 12 मिनट से अधिक समय तक सफल संचालन कर अपनी विश्वसनीयता साबित की। इस उपलब्धि के साथ भारत अब उन चुनिंदा देशों की सूची में शामिल हो गया है, जिनके पास इतनी उन्नत रक्षा तकनीक मौजूद है।
क्या है स्क्रैमजेट तकनीक और क्यों है यह खास?
यह इंजन हाइपरसोनिक स्क्रैमजेट (Supersonic Combustion Ramjet) तकनीक पर आधारित है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी असाधारण रफ्तार है—यह ध्वनि की गति से पांच गुना से भी अधिक, यानी करीब 6,100 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल कर सकता है। इतनी तेज़ गति के कारण दुश्मन को प्रतिक्रिया देने का लगभग कोई अवसर नहीं मिलता।
इसके अलावा, यह इंजन वातावरण से ही ऑक्सीजन लेकर ईंधन जलाता है। इससे मिसाइल को अलग से ऑक्सीजन ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती, वह हल्की बनती है और लंबी दूरी तक अत्यधिक सटीक वार करने में सक्षम होती है। यही वजह है कि यह तकनीक आधुनिक युद्धों में गेम-चेंजर मानी जा रही है।
DRDL की उपलब्धि और आत्मनिर्भर भारत की दिशा
हैदराबाद स्थित डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी (DRDL) ने इस इंजन का डिज़ाइन और विकास किया है। यह सफल परीक्षण इस बात का संकेत है कि भारत अब अपनी खुद की हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल के विकास के बेहद करीब पहुंच चुका है।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस सफलता को देश के लिए एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि न सिर्फ भविष्य के युद्धों में भारत की रणनीतिक क्षमता को मजबूत करेगी, बल्कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को भी सशक्त रूप से दुनिया के सामने रखेगी।
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