Wednesday, 10 June 2026

12 साल में मोदी सरकार के 12 बड़े फैसले, जिसने बदल दी देश की राजनीति

 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने सत्ता में 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं। एक दशक से अधिक के इस कार्यकाल में सरकार ने कई ऐसे महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं, जिन्होंने देश की राजनीति की दिशा को बदल दिया है और भारत के सामाजिक तथा आर्थिक ढांचे पर गहरा प्रभाव डाला है। यहां ऐसे 12 प्रमुख निर्णयों का उल्लेख किया जा रहा है।

अनुच्छेद 370 का समाप्त होना
5 अगस्त 2019 को सरकार ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को समाप्त कर दिया। इसके साथ ही राज्य का विशेष संवैधानिक दर्जा समाप्त हो गया।

ईडब्ल्यूएस 10% आरक्षण
2019 में सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) को शिक्षा और नौकरी में 10% आरक्षण देने का प्रावधान लागू किया गया।

नागरिकता संशोधन कानून (CAA)
2019 में पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए धार्मिक रूप से प्रताड़ित हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, ईसाई और पारसी समुदायों को नागरिकता देने का प्रावधान किया गया।

अयोध्या राम मंदिर निर्माण
2019 के सुप्रीम कोर्ट फैसले के बाद अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की प्रक्रिया शुरू हुई और आज यह भव्य रूप में तैयार हो चुका है।

प्रमुख कल्याणकारी योजनाएं
स्वच्छ भारत मिशन, जनधन योजना, उज्ज्वला योजना, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, पीएम आवास योजना, आयुष्मान भारत और जल जीवन मिशन जैसी योजनाएं लागू की गईं।

वस्तु एवं सेवा कर (GST)
1 जुलाई 2017 से जीएसटी लागू कर पूरे देश में एकीकृत कर प्रणाली स्थापित की गई।

नोटबंदी
8 नवंबर 2016 को 500 और 1000 रुपये के नोट बंद कर काले धन और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने का प्रयास किया गया।

पुराने कानूनों का अंत
ब्रिटिश काल के 1200 से अधिक कानून समाप्त किए गए तथा आईपीसी, सीआरपीसी और एविडेंस एक्ट की जगह नए भारतीय कानून लागू किए गए।

तीन तलाक पर रोक
मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की सुरक्षा हेतु तीन तलाक को अपराध घोषित किया गया और इसे कानूनन प्रतिबंधित किया गया।

बुनियादी ढांचे का विस्तार
रेलवे, सड़क, हवाई अड्डे और मेट्रो नेटवर्क का बड़े स्तर पर विस्तार हुआ। वंदे भारत ट्रेनें शुरू हुईं, एयरपोर्ट की संख्या बढ़ी और रेलवे विद्युतीकरण तेजी से पूरा किया गया। 

Thursday, 30 April 2026

“फ्यूल फॉर फ्यूचर: भारत ने यूरेनियम बाजार में खेला मास्टरस्ट्रोक”

 भारत और कजाकिस्तान के बीच यूरेनियम आपूर्ति को लेकर हुआ हालिया समझौता केवल एक व्यापारिक डील नहीं, बल्कि बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन का संकेत है। लगभग 4 अरब अमेरिकी डॉलर के इस करार में कजाकिस्तान की राष्ट्रीय परमाणु कंपनी काजाटोमप्रोम भारत को दीर्घकालिक रूप से प्राकृतिक यूरेनियम कंसन्ट्रेट उपलब्ध कराएगी।

इस समझौते को काजाटोमप्रोम के शेयरधारकों ने 92.9% बहुमत से मंजूरी दी—जो यह दर्शाता है कि यह सौदा केवल व्यावसायिक नहीं, बल्कि रणनीतिक प्राथमिकता भी है। एशिया में यह इस दशक की सबसे बड़ी परमाणु ईंधन साझेदारियों में गिना जा रहा है।

भारत ने लंबे समय से ऊर्जा आत्मनिर्भरता की बात की है, लेकिन आधुनिक अर्थों में आत्मनिर्भरता का मतलब ‘सब कुछ देश में पैदा करना’ नहीं, बल्कि एक ऐसी मजबूत और विविध आपूर्ति शृंखला बनाना है, जो किसी भी वैश्विक संकट में बाधित न हो। यूरेनियम के लिए कजाकिस्तान, तेल के लिए बहुस्तरीय स्रोत, गैस के लिए दीर्घकालिक अनुबंध और नवीकरणीय ऊर्जा में घरेलू विस्तार—ये सभी मिलकर ही वास्तविक ऊर्जा सुरक्षा का ढांचा तैयार करते हैं।

यह डील भारत की ऊर्जा रीढ़ को मजबूत करने के साथ-साथ उसके परमाणु कार्यक्रम को स्थिरता देगी। साथ ही, मध्य एशिया में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को भी मजबूती मिलेगी। कजाकिस्तान के लिए यह निर्यात विस्तार हो सकता है, लेकिन भारत के लिए यह भविष्य की औद्योगिक शक्ति, निरंतर बिजली आपूर्ति और रणनीतिक स्वायत्तता में निवेश है।

इस समझौते का प्रभाव वैश्विक यूरेनियम बाजार पर भी पड़ेगा। जब इतना बड़ा हिस्सा द्विपक्षीय अनुबंधों में “लॉक” हो जाता है, तो खुले बाजार (स्पॉट और टर्म मार्केट) की तरलता घटती है। इसका सीधा अर्थ है—आने वाले समय में आपूर्ति सीमित और कीमतों में अस्थिरता बढ़ सकती है। भारत ने इस संभावित कमी से पहले ही अपनी स्थिति मजबूत कर ली है।

ध्यान देने वाली बात यह भी है कि काजाटोमप्रोम दुनिया का सबसे बड़ा यूरेनियम उत्पादक है। ऐसे उत्पादक के साथ दीर्घकालिक संबंध स्थापित करना यह संकेत देता है कि भारत अब ऊर्जा को केवल आर्थिक जरूरत नहीं, बल्कि रणनीतिक शक्ति-प्रक्षेपण के साधन के रूप में देख रहा है।

कजाकिस्तान के लिए भी यह डील सामान्य नहीं है। कंपनी ने इसके लिए औपचारिक Extraordinary General Meeting आयोजित की, मतदान कराया और परिणाम सार्वजनिक किए—यह सब इस बात का संकेत है कि भारत अब उसके लिए एक साधारण ग्राहक नहीं, बल्कि एक रणनीतिक साझेदार बन चुका है।

वैश्विक संसाधन राजनीति की वास्तविक भाषा यही है—जहां कुछ देश बयान देते हैं, वहीं उभरती शक्तियां आपूर्ति शृंखलाएं गढ़ती हैं। आज के दौर में युद्ध केवल सीमाओं पर नहीं, बल्कि यूरेनियम, तेल, गैस, सेमीकंडक्टर, रेयर अर्थ और समुद्री मार्गों पर नियंत्रण को लेकर भी लड़े जा रहे हैं।

इस समझौते ने एक बात स्पष्ट कर दी है—नई दिल्ली अब केवल प्रतिक्रिया देने वाली शक्ति नहीं रही, बल्कि वह पहले कदम उठाने वाली, भविष्य की दिशा तय करने वाली शक्ति के रूप में उभर रही है।

Thursday, 2 April 2026

भारत के रक्षा निर्यात में बड़ी छलांग


भारत के रक्षा क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि सामने आई है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात बढ़कर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। अगर पिछले साल से तुलना करें, तो यह लगभग 62.66% की जबरदस्त बढ़ोतरी है। पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में यह आंकड़ा 23,622 करोड़ रुपये था।

इस सफलता में सरकारी कंपनियों (डीपीएसयू) और निजी कंपनियों—दोनों का बड़ा योगदान रहा है। कुल निर्यात में सरकारी कंपनियों की हिस्सेदारी करीब 54.84% रही, जबकि निजी कंपनियों का योगदान 45.16% रहा। इसका मतलब यह है कि भारत में अब रक्षा उत्पादन सिर्फ सरकारी क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि निजी कंपनियां भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं।


रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इस उपलब्धि की तारीफ करते हुए कहा कि यह भारत की स्वदेशी ताकत का प्रमाण है। दुनिया अब भारत के हथियारों और रक्षा तकनीक पर भरोसा करने लगी है। उन्होंने इसे भारत की “सफलता की शानदार कहानी” बताया।

अगर आंकड़ों को और सरल तरीके से समझें, तो इस साल करीब 14,802 करोड़ रुपये का अतिरिक्त निर्यात हुआ है। खास बात यह है कि सरकारी कंपनियों के निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 151% की बहुत तेज बढ़ोतरी हुई है। वहीं निजी कंपनियों ने भी 14% की अच्छी ग्रोथ दिखाई है। निजी क्षेत्र ने 17,353 करोड़ रुपये का निर्यात किया, जबकि सरकारी कंपनियों का योगदान 21,071 करोड़ रुपये रहा।

आज भारत 80 से ज्यादा देशों को रक्षा उपकरण निर्यात कर रहा है। साथ ही, निर्यात करने वाली कंपनियों की संख्या भी बढ़कर 128 से 145 हो गई है। यानी अब ज्यादा कंपनियां इस क्षेत्र में काम कर रही हैं।

अब बात करते हैं उन हथियारों की, जिनकी दुनिया में सबसे ज्यादा मांग है—

1. ब्रह्मोस मिसाइल
यह एक सुपरसोनिक मिसाइल है, जो बहुत तेजी से लक्ष्य पर हमला करती है। इसकी मारक क्षमता करीब 300 किलोमीटर है। फिलीपींस, वियतनाम, इंडोनेशिया और यूएई जैसे देश इसमें दिलचस्पी दिखा रहे हैं।

2. तेजस फाइटर जेट
तेजस भारत का अपना बनाया हुआ लड़ाकू विमान है। यह हवा में और जमीन पर दोनों तरह के मिशन कर सकता है। अर्जेंटीना, मलेशिया और नाइजीरिया जैसे देश इसे खरीदने में रुचि दिखा रहे हैं।

3. आकाश मिसाइल सिस्टम
यह एक एयर डिफेंस सिस्टम है, जो दुश्मन के हवाई हमलों को रोक सकता है। सऊदी अरब, वियतनाम और केन्या जैसे देश इसमें दिलचस्पी ले रहे हैं।

4. पिनाका रॉकेट लॉन्चर
यह एक ऐसा सिस्टम है जो एक साथ कई रॉकेट दाग सकता है। इसकी रेंज 75 से 120 किलोमीटर तक है। इसे आर्मेनिया को निर्यात किया जा चुका है और कई अन्य देशों में भी इसकी मांग है।

5. अर्जुन टैंक
यह एक आधुनिक युद्धक टैंक है, जिसमें उन्नत तकनीक और शक्तिशाली हथियार लगे हैं। अफ्रीकी देशों और नाइजीरिया जैसे देशों ने इसमें रुचि दिखाई है।

इन सबके पीछे सबसे बड़ी वजह यह है कि भारत अब अपने हथियार खुद बना रहा है और उनकी गुणवत्ता भी अच्छी है। दुनिया को भारत के उत्पाद सस्ते, भरोसेमंद और प्रभावी लग रहे हैं।

सरकार का लक्ष्य है कि भारत दुनिया के बड़े रक्षा निर्यातक देशों में शामिल हो। इसके लिए ‘मेक इन इंडिया’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ जैसी योजनाओं को बढ़ावा दिया जा रहा है। साथ ही, व्यापार को आसान बनाने और कंपनियों को ज्यादा सुविधाएं देने पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

कुल मिलाकर, यह उपलब्धि सिर्फ आंकड़ों की नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि भारत अब रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन रहा है और दुनिया में अपनी मजबूत पहचान बना रहा है। आने वाले समय में भारत एक बड़े रक्षा निर्यातक देश के रूप में उभर सकता है।

Monday, 30 March 2026

जन-जन के राम: आस्था, साहस और संतुलन की जीवंत शक्ति


संसारी समाज रामनवमी के दिन राम के जन्मोत्सव को बड़े हर्ष और उल्लास के साथ मनाता है। जो स्वयं जन्म और मरण के बंधनों से परे हैं, उनके अवतरण की कल्पना मात्र से ही लोक-मन पुलकित हो उठता है। राम के आगमन के उत्साह में समाज विविध कल्पनाएँ सँजोता हैकोई अपने आँगन को सजा-सँवार कर उनका स्वागत करता है, तो कोई उनके लिए रुचिकर भोग की व्यवस्था करने में तल्लीन हो जाता है। राम एक हैं, पर उन्हें देखने की दृष्टि भिन्न-भिन्न है- जाकी रही भावना जैसी। प्रभु मूरति देखी तिन तैसी॥ राम को सब अपनी-अपनी अंतर्दृष्टि और भावना के अनुरूप देखते हैं। संतों के लिए वे प्रेम और करुणा के सागर, भक्तों के लिए आराध्य, प्रजा के लिए आदर्श राजा, तो सीता जी के लिए उनके प्राणप्रिय पति थे। राम सत्य, धर्म और मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में सबके हृदयों में रमे हैं। वाल्मीकि  और तुलसीदास के राम में अंतर है, तुलसीदास ने सृष्टि के समस्त सजीव और निर्जीव को सियाराममय कहा, जबकि भवभूति  के राम एक अलग भावभूमि में स्थापित होते हैं। कबीर ने राम को निर्गुण माना, उन्होंने राम को परम ब्रह्म के रूप में देखा—“कस्तूरी कुण्डल बसे, मृग ढूँढे बन माही”—अर्थात राम हर हृदय में हैं, पर मनुष्य उन्हें बाहर खोजता है और सूर्यकांत त्रिपाठी निराला ने शक्ति और मर्यादा का आदर्श माना । महात्मा गांधी के राम सत्य और करुणा के प्रतीक हैं, राम मनोहर लोहिया के राम सामाजिक न्याय और लोककल्याण के प्रतीक हैं।

भारतीय समाज में राम केवल धार्मिक प्रतीक नहीं, बल्कि मर्यादा, आदर्श, विनम्रता, विवेक और संयम के जीवंत रूप हैं। वे मर्यादा पुरुषोत्तमहैंऐसा आदर्श जिसे आस्तिक ही नहीं, बल्कि हर संवेदनशील मनुष्य स्वीकार करता है। वे स्थितप्रज्ञ, अनासक्त और असंपृक्त लोकनायक हैं, जिनमें सत्ता के प्रति मोह नहीं, बल्कि उत्तरदायित्व का भाव है। राम यह देश राम का हैराम जो किसी एक मंदिर, कथा या रूप में सीमित नहीं, बल्कि हर कण, हर भावना और हर कर्म में व्यापक हैं। वे केवल आस्था नहीं, बल्कि अनुभव हैं। भाव की हर हिलोर में राम हैं, कर्म के हर छोर पर राम हैं। वे यत्र-तत्र नहीं, सर्वत्र हैंजिसमें वे रम जाएँ, वही राम हो जाता है। है। राम धर्म के साकार रूप हैंजिसे राम प्रिय नहीं, उसे धर्म भी प्रिय नहीं हो सकता।

राम इस देश की एकता के सूत्रधार भी हैं। अयोध्या से लेकर लंका तक की उनकी यात्रा केवल भौगोलिक नहीं, सांस्कृतिक एकता का विस्तार है । राम साध्य हैं, साधन नहीं। राम कोई मात्र ऐतिहासिक या राजनैतिक व्यक्तित्व नहीं, बल्कि सनातन, अजन्मा और अद्वितीय सत्ता के प्रतीक हैं। वे केवल दशरथ के पुत्र या अयोध्या के राजा तक सीमित नहीं, बल्कि आत्मशक्ति, नैतिकता और अटूट संकल्प के जीवंत प्रतीक हैं। राम उस आंतरिक शक्ति का स्वरूप है, जो मनुष्य को विपरीत परिस्थितियों में भी सत्य और धर्म के मार्ग पर अडिग रहने की प्रेरणा देता है। वह निर्बलों के सहारा है और समाज के हर वर्ग के लिए आशा के स्रोत है। उनकी कसौटी किसी एक व्यक्ति या वर्ग का नहीं, बल्कि सम्पूर्ण प्रजा के सुख और कल्याण का मापदंड है। राम का जीवन उस आदर्श का प्रतीक है, जहाँ उन्नति किसी के अधिकारों का हनन करके नहीं, बल्कि सभी को साथ लेकर, न्याय और मर्यादा के मार्ग पर चलकर प्राप्त की जाती है। यही राम महात्मा गांधी  के लिए वह नैतिक शक्ति बने, जिसके सहारे पूरे देश को अंग्रेज़ी साम्राज्य से संघर्ष करने के लिए प्रेरित किया और उसी राम के नाम पर इस देश मे आदर्श व्यवस्था की कल्पना की । गांधी ने रामराज्य का आदर्श इसलिए चुना क्योंकि वे भारत की एकता और मर्यादा के प्रतीक हैं। वे ऐसे रामराज्य के पक्षधर थे जहाँ लोकहित सर्वोच्च हो। राम केवल अतीत नहीं, एक जीवित चेतना हैंजो समाज को दिशा देती है और मनुष्य को उसका नैतिक दर्पण दिखाती है।

राम का जीवन त्याग और संतुलन का उदाहरण है। राम जनस्वीकृत, शक्तिशाली राजा थे, पर अहंकार से अछूते रहे। अपार शक्ति के बावजूद उन्होंने कभी मनमाने निर्णय नहीं लिए। वे मर्यादा, सामूहिकता और धर्म के प्रति प्रतिबद्ध रहे, तथा मानव और वानर सभी के प्रति करुणा व कर्तव्य निभाते रहे। वे शक्ति के केंद्र होते हुए भी उसका विस्तार नहीं करते। अयोध्या से लंका तक विजय प्राप्त करने के बाद भी उन्होंने राज्यों को अपने अधीन नहीं कियालंका विभीषण को और किष्किंधा सुग्रीव को सौंप दी। यह उनके वैराग्य और मर्यादा का प्रमाण है।

राम का आदर्श लक्ष्मण रेखाकी मर्यादा में है सीमा में जीवन सुख और सुरक्षा देता है, उल्लंघन अनर्थ लाता है। वे जाति-वर्ग से परे सबके हैंनिषादराज, सुग्रीव, शबरी, जटायु सभी को साथ लेकर चलने वाले। राम ने राजा, पुत्र, भाई और पति के रूप में उच्च आदर्श स्थापित किए, जो हर युग में प्रासंगिक हैं। भरत के लिए आदर्श भाई, हनुमान के स्वामी, और प्रजा के लिए न्यायप्रिय राजा हैं। उन्होंने परिवार और दांपत्य को नई गरिमा दीएकनिष्ठ दांपत्य प्रेम उनका जीवन-आदर्श रहा, सीता के वियोग में उनकी करुणा स्पष्ट दिखती है। पिता की आज्ञा का पालन कर उन्होंने संबंधों को नई ऊंचाई दी। उनका जीवन समावेश, कर्तव्य और प्रेम का अद्वितीय संतुलन है, जो आज भी प्रेरणा देता है।

विश्व साहित्य में राम जैसा चरित्र अद्वितीय हैन वैसी मर्यादा, न वैसा पौरुष, न वैसी तितिक्षा। वे संतुलन के प्रतीक हैंअमीरों की आस्था भी, और गरीबों का संबल भी। उनका नाम ही कठिन से कठिन परिस्थितियों में जीने का साहस देता है। त्रेतायुग में अवतरित होकर भी वे आज तक जन-जन के जीवन में उपस्थित हैं-जड़ चेतन जग जीव जत सकल राममय जानि।भक्तों के अनुभवों में राम बार-बार प्रकट होते हैंकभी संकटमोचक बनकर, तो कभी मार्गदर्शक बनकर। विज्ञान और तर्क जहाँ सीमित हो जाते हैं, वहाँ से राम का भावलोक आरंभ होता है। वे अंतर्मन की शक्ति हैं, जीवन की सृष्टि और सृष्टि के जीवन के आधार हैं। राम जोड़ने वाले हैं, तोड़ने वाले नहीं। रामराज्य का आदर्श सर्वे भवन्तु सुखिनःऔर "परहित सरिस धर्म नहीं भाई" की भावना पर आधारित है, जहाँ सभी के सुख और निर्भय जीवन की कामना की जाती है।

Tuesday, 24 March 2026

ईसाई धर्म अपनाने पर अनुसूचित जाति का दर्जा हो जाएगा खत्म

 सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया है कि जो व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म को अपनाता है, उसे अनुसूचित जाति (SC) का सदस्य नहीं माना जा सकता।

जस्टिस पी. के. मिश्रा और एन. वी. अंजारिया की पीठ ने कहा कि किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करते ही व्यक्ति का SC दर्जा समाप्त हो जाता है। अदालत ने आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले को भी बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति अनुसूचित जाति का लाभ जारी नहीं रख सकते।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कोई व्यक्ति एक साथ दो दावे नहीं कर सकताएक ओर वह क्लॉज 3 में बताए गए धर्मों (हिंदू, सिख, बौद्ध) से बाहर का धर्म माने और दूसरी ओर SC का दर्जा भी बनाए रखे।

साथ ही, यदि कोई व्यक्ति पुनः हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म में लौटने का दावा करता है, तो उसे यह तीनों शर्तें पूरी तरह साबित करनी होंगी कि उसका पुनः धर्मांतरण वास्तविक और सामाजिक रूप से स्वीकार्य है।

इस फैसले का महत्व:

1. कानूनी स्पष्टता:

यह निर्णय अनुसूचित जाति की परिभाषा को लेकर लंबे समय से चल रही कानूनी अस्पष्टता को दूर करता है।

2. आरक्षण नीति पर असर:

SC दर्जा विशेष सामाजिक-ऐतिहासिक भेदभाव के आधार पर दिया जाता है। यह फैसला सुनिश्चित करता है कि इसका लाभ उन्हीं समुदायों को मिले, जिनके लिए यह मूल रूप से निर्धारित है।

3. धर्म और सामाजिक पहचान का संबंध:

अदालत ने यह स्पष्ट किया कि SC दर्जा केवल जन्म नहीं, बल्कि उस सामाजिक संरचना से जुड़ा है, जो विशेष धर्मों में ऐतिहासिक रूप से मौजूद रही है।

4. दुरुपयोग पर रोक:

यह निर्णय संभावित दुरुपयोग को रोकने में मदद करेगा, जहाँ व्यक्ति अलग धर्म अपनाकर भी आरक्षण का लाभ लेना चाहता है।

5. ईसाई या इस्लाम धर्म अपना चुके दलित व्यक्ति अब SC/ST कानून के तहत संरक्षण का दावा नहीं कर सकते।

6. प्रमाण पत्र का महत्व: यदि धर्म बदलने के बाद भी पुराना SC प्रमाण पत्र बना हुआ है, तो भी उसे कोर्ट में मान्य नहीं माना जाएगा, क्योंकि धर्मांतरण के बाद वे वैधानिक रूप से SC श्रेणी में नहीं आते।

कुल मिलाकर, यह फैसला न केवल कानूनी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सामाजिक न्याय और आरक्षण व्यवस्था की मूल भावना को बनाए रखने की दिशा में भी एक अहम कदम माना जा रहा है।