एलन मस्क के स्टारशिप रॉकेट के ताज़ा परीक्षण की दुनियाभर में चर्चा हो रही है| यह अब तक का सबसे जोखिमभरा परीक्षण था। असल में इस परीक्षण के दौरान स्टारशिप रॉकेट को लॉन्च पैड पर वापस सुरक्षित उतारा गया और एलन मस्क की स्पेसएक्स कंपनी ऐसा कारनामा करने वाली दुनिया की पहली कंपनी बन गई है| इसमें कंपनी ने पहली बार बूस्टर को वापस लॉन्च पैड पर उतारा। यह अंतरिक्ष यात्रा के इतिहास में एक बड़ा कदम है |
इस परीक्षण के बाद तेज़ी से और दोबारा
इस्तेमाल करने वाले रॉकेट बनाने की अपनी महत्वाकांक्षी परियोजना में स्पेसएक्स अहम
चरण में पहुंच गया है|
स्पेस एक्सप्लोरेशन के मिशन में सबसे
बड़ी समस्या है- हर बार एक नये रॉकेट या लॉन्च व्हीकल का इस्तेमाल
करके सैटेलाइट को स्पेस
में भेजना, जो बेहद ही खर्चीला काम है| हर बार का कई सौ या हजारों
करोड़ का खर्च होता है| ऐसे में दोबारा उपयोग किए जाने वाले रॉकेट की समस्या
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों और सरकारों के लिए सरदर्द बनी हुई थी, जिसे एलन मस्क और उनकी
कंपनी ने इस साहसिक परिक्षण के माध्यम से समाधान कर लिया है | स्टारशिप रॉकेट की
सबसे महत्वपूर्ण विशिष्टता उसका दोबारा उपयोग किया जाना है|
स्टारशिप दुनिया का सबसे शक्तिशाली
रॉकेट है। यह 121 मीटर लंबा है। इसमें 33 मीथेन इंजन लगे हैं। इस रॉकेट ने टेक्सास
के दक्षिणी छोर से सुबह 7:25 बजे उड़ान भरी। उड़ान के लगभग ढाई मिनट बाद, सुपर हैवी बूस्टर स्टारशिप के ऊपरी
हिस्से से अलग हो गया। बूस्टर सात मिनट बाद वापस आया। लॉन्च टॉवर पर बूस्टर को सुरक्षित लैंड
कराया गया। केवल बूस्टर ही सटीक तरीक़े से नहीं उतरा बल्कि स्पेसएक्स ने यान के
हार्डवेयर के कुछ हिस्सों को सुरक्षित बचाने में कामयाबी भी हासिल की, जिसकी उम्मीद नहीं की जा रही थी| इसका
मतलब यह है कि यदि कोई रॉकेट पहली बार उड़ान में विफल हो जाता है, तो इसे दोबारा उड़ाया जा सकता है|
इस परीक्षण को स्पेसएक्स के सबसे साहसी
और सफल अभियानों में से एक माना जा रहा है। इससे पहले, जून 2024 में स्पेसएक्स ने एक सफल उड़ान भरी थी, जिसमें रॉकेट ने बिना किसी विस्फोट के
अपनी यात्रा पूरी की। यह स्टारशिप रॉकेट का पांचवा परीक्षण था, जिसमें कोई बड़ी तकनीकी खामी सामने
नहीं आई और यह सफलतापूर्वक अपने मिशन को अंजाम दे सका।
यह रॉकेट 150 टन पेलोड ले जाने की क्षमता रखता है, जो इसे और भी प्रभावी बनाता है। इसके 33 रैप्टर इंजन इसे अब तक का सबसे
शक्तिशाली और तेज गति वाला रॉकेट बनाते हैं, जिसकी गति 27,000 किमी/घंटा
तक पहुंच सकती है।
बूस्टर के सुरक्षित रूप से वापस आने को
स्पेस एक्स के इंजीनियरों ने “ऐतिहासिक
दिन” क़रार दिया है |
इस सफलता का अंतरिक्ष यात्रा के भविष्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि
यह मिशन की लागत को काफी कम कर सकता है और लगातार लॉन्च की क्षमता को बढ़ा सकता
है। लॉन्च पैड पर बूस्टर को सुरक्षित रूप से उतारने से मिशनों की जटिलता में कमी
आएगी, जिससे अंतरिक्ष यानों को तेजी से मिशन पर भेजने में मदद मिलेगी। स्टारशिप
कार्यक्रम का उद्देश्य चंद्रमा और मंगल ग्रह के मिशन सहित गहरे अंतरिक्ष अन्वेषण
को सुविधाजनक बनाना है, जिससे
यह उपलब्धि उन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को साकार करने में एक महत्वपूर्ण कदम बन
सके।
यह न केवल एलन मस्क के लिए एक व्यक्तिगत
उपलब्धि है, बल्कि पूरी मानवता के लिए एक नई संभावनाओं का
द्वार भी खोलता है। इस परीक्षण के माध्यम से अब एलन मस्क दुनिया के पहले
ट्रिलियनॉयर भी बन जाएंगे| भविष्य में अंतरिक्ष यात्रा को और अधिक आम और सस्ता
बनाने के लिए यह तकनीक एक महत्वपूर्ण आधार बन सकती है। यह परीक्षण मंगल और अन्य
ग्रहों पर भी मानव मिशनों की संभावनाओं को खोलता है। इससे विभिन्न सरकारों और
कंपनियों के लिए अंतरिक्ष में अपने मिशनों को आयोजित करना आसान हो जाता है।
कुछ ही सालों में एलन मस्क की स्पेसएक्स
दुनिया में सबसे ज्यादा सैटेलाइट लॉन्च करने वाली
कंपनी बन गई है| यह कई ट्रिलियन डॉलर का व्यवसाय है, जिसपर अभी एलन मस्क का एकाधिकार है|
भारत का इसरो भी सैटेलाइट लॉन्च करने की दिशा में काफी पहले ही
कदम बढ़ा चुका है, लेकिन इसे काफी दूरी तय करनी है|